अभिताभनामा-44 साल एक नायक .....{विशेष }

जोशीली आवाज़ .
शानदार कद कद काठी ...
चेहरे पर उम्र की झुर्रियां ....
कभी ना ख़त्म ना होने वाला जूनून ...
और साथ में
तमाम पीढियों को प्रतिनिधित्व करने की दमदार क्षमता.....

अभिताभ बच्चन में
ऐसा क्या है की वो महानायक बन जाते है दरसल वो महानायक ऐसे ही नहीं बने उन्होंने एक बड़ा सफ़र तय किया है,एक ऐसा सफ़र जिस में कई रुकावटें रहीं ,लेकिन यह नायक फिर भी नहीं हारा और चलता चला गया और एक दिन .....वो महानाय
क बन गया... महानायक का यह सफ़र अब 40 साल का हो गया है ..दरअसल हमनें बीते वक्त यह देखा है की अभिताभ बॉलीवुड के सबसे सफल कलाकार के रूप में सामने आये है...आखिर मुकद्दर के इस सिकंदर के अन्दर ऐसी क्या बात है कि वो "अजूबा" बनकर पूरी दुनिया को अपने अभिनय के कौशल में फंसा लेता है ...
दरअसल उन्है मालूम है की तेज़ चिल्लानें से ज्यादा आहट शांत रहने में होती है,वो जानता है की
आवाज़ बूढी होने से कुछ नहीं होता .. उसको पता है की दर्शक में ही भगवान् छिपा होता है.. उसे तेज़ दौड़ना आता है, वो जानता है की "डॉन" के "अभिमान" का मतलब क्या होता है, यह हकीकत है की बॉलीवुड का यह "शहंशाह" जब जब सड़कों पर चला तब तब लोगो की आँखों से ख़ुशी के मारे आंसूं झलक आये ..दरअसल अभिताभ बालीवुड के वो सितारे है जिन्होंने न सिर्फ भारत में अपना सिक्का जमाया बल्कि विश्व मंच पर
भी भारत का नाम रोशन किया.....लेकिन यह सच था की हर कलाकार की ज़िन्दगी में एक ऐसा दौर भी आता है जब वो अपनी ज़िन्दगी और आशाओं को साथ लेकर अपनी निजी ज़िन्दगी में दाखिल होता है तो हर किसी को ऐसा लगता है कि मानो वो अभिनय की दुनिया में हो ..सदी के इस कलाकार के साथ वो सब कुछ हुआ जिससे उसकी बनाई हुई इमारत अचानक ढहने लगी ,जो अभिनेता फ़िल्मी पर्दों पर कभी गिरे हुए पैसे नहीं उठाता था,वो अपने सबसे बुरे दौर से गुजरने लगा ,वो राज़ -नेताओं के गलें मिलते देखा गया यह दौर अभिताभ की त्रासदी का दौर था ,एक ऐसा दौर जिसने "ज़ंजीर" के इस पुलिस वाले को "कालिया" बना दिया ,दरसल उस दौर में अभिताभ की क म्पनी ABCL दिवालिया घोषित हो गई......दरसल यह एक कलाकार की दुनिया है जहां मुस्कराना उसकी जरुरत है....
अभिताभ उस वक्त भी मुस्कराते रहे ..किसी को नहीं मालूम था की ज़ंजीर का यह पुलिस वाला इतनी जल्दी उठ खडा होगा और "करोड़पति" बन जाएगा,किसी को नहीं मालूम था की "ब्लैक" उनकी ज़िन्दगी में रोशनियाँ बिखेर देगी.. अभिताभ फिर जागे ...बेशक उनकी आवाज़ अब बूढी हो गई थी, लेकिन वो आवाज़ युवाओं के साथ खड़ी दिखी, यह जीत अभिताभ की थी ,यह जीत उनके होसलों की थी...दरसल अभिताभ बच्चन एक महान अभिनेता है ,जिन्हें मालूम है की "सरकार राज़" आखिर क्या होता है,दरसल 21 वी सदी के इस बूढे बाप को मालूम था की " मोहब्बतें" में जमाने से आखिर कैसा लड़ा जाता है ,वो ज़िन्दगी की सारी जंग जीतता रहता है,अभिताभ जब जब आगे बड़े वो अपने पीछे कई परिभाषाओं को गढ़ते चले आये .दरअसल एक कलाकार की कुछ सीमाए होती है,कुछ मर्यादाए होती है बीते वक्त में ह मने देखा की अभिताभ बचान उन मर्यादों से काफी दूर खड़े होकर आने वाली अभिनय की पीढी को रास्ता देते रहे .......शायद इसलिए अभिताभ ने बीते 40 सालों में कई महान उपलब्धियां हासिल की ......तभी तो यह कलाकार बिग बॉस बन गया
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आपसे निवदेन आप इस लेख पर अपनी राय जरुर दे ....आशीष
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11 Responses
  1. wonderful,nicely done, congratulations. keep it up. sat pal



  2. ????????????
    लेखन में थोड़ी गंभीरता लाओ।


  3. REECH ( BHALU) Says:

    ARE AAP ITNA ACHA KYU LIKHTE HAI BHAI PAGAL HO KA .... YE SB SB BIKAU HAI .. KAHE PAGAL HO RHE HAI ......ART FACULTY JAYIYE


  4. rahul shangahvi Says:

    outstanding bhaai shaahab


  5. varun Says:

    अच्छा लिखा है भाई



  6. बेनामी Says:

    outstanding...article


  7. anjule shyam Says:

    is artical se liye ....................aapko salam..... big b ko aapne is chote artocal ke jariye hi puri terah se rekhankit kar diya hai.....
    dubara......salam jindgi....
    anjule shyam maurya.
    anjuleshyam@gmail.com



  8. बच्चन साब की फ़िल्मों के नाम का आपने काफी ख़ूबसूरत प्रयोग किया है वाक्यों में. लेकिन आप प्रूफ रीडिंग पर ध्यान दें. और साथ ही साथ कुछ यौगिक शब्दों के दुहराव पर भी. जैसे कि, 'दरअसल'.


  • EXCLUSIVE .....:

    salaazmzindagii

    अशोक जी को कोटि कोटि नमन -- सलाम ज़िन्दगी टीम miss u ashok sir

    ASHISH JAIN


    सुधी सिद्धार्थ ..........

    ज़िन्दगी का हिस्सा बनें और कहें सलाम ज़िन्दगी

    सलाम ज़िन्दगी को जाने ..

    मेरी फ़ोटो
    वर्तमान में एक न्यूज़ चैनल में कार्य कर रहा हूँ,पत्रकारिता की शुरुआत जनसत्ता से की .जहा प्रभाष जोशी, ओम थानवी और वीरेंद्र यादव के साथ काम करने का मौका मिला ,उसके बाद पत्रकारिता की तमाम गन्दगी को अपनी आँखों से देखते हुए आज तक में ट्रेनिंग करने का अवसर मिला वहा नकवी जी,राणा यसवंत ,अखिल भल्ला ,मोहित जी के साथ काम किया तक़रीबन ६ महीने वहा काम करने के बाद आँखों देखी से होते हुए एक बड़े न्यूज़ चैनल में एक छोटा सा कार्य कर रहा हूँ या दूसरे शब्दौं में कहूँ तो मन की कोमलताओं को हर रोज़ तिल तिल कर मार रहा हूँ ,लिखने का शौक है ,कुछ अखबारों में सम्पादकीय भी लिखे है ,लेकिन हकीकत यही है की आँखौं से बहते हुए आसूँ इतनी तकलीफ नहीं देते जितनी पलकों पर रुके हुए मोती करते है ,शायद इसीलिए मैं आज जहा हूँ ,वहा से सिर्फ अँधेरा दिखता है ......ASHIISH JAIN